कई साल तक दर्जनों औरतें गुरमीत से रेप होती रहीं
‘महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सतगुरु को अर्पण करने को कहा था. सो अब ये तन मन हमारा है.’
जिस ‘महाराज’ की बात ऊपर की गई है, वो रेपिस्ट गुरमीत सिंह है. जो बाबा गुरमीत राम रहीम के नाम से जाना जाता रहा है. ये उसी वायरल हो चुके ख़त का एक हिस्सा है, जो गुरमीत के हाथों सताई गई एक औरत ने साल 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा था.
बाबा ने साध्वी का रेप किया. सिर्फ इसलिए नहीं कि उसके अंदर ऐसी कामुकता थी जिसे मिटाने का कोई जरिया नहीं था उसके पास या महज इसलिए नहीं कि वो पुरुष था, जिसके नाते वो शारीरिक रूप से कमजोर इंसान का रेप कर सकता था. गुरमीत ने रेप किया, एक बार नहीं, कई लड़कियों का, कई साल तक, कई बार, क्योंकि उसे पता था कि वो ‘बाबा’ है. यानी वो आम इंसान नहीं है. वो उनसे ऊपर है. इसीलिए औरत हो या पुरुष, उसका सबपर हक़ है.
बाबा राम-रहीम पहला बाबा नहीं जिसे इस तरह की हरकत के बाद गिरफ्तार किया गया हो. आसाराम, रामपाल, परमानंद–नाम बहुतेरे हैं. और ये वो नाम हैं जो मीडिया में उछले, क्योंकि ये बड़े नाम थे. धर्मगुरुओं, मौलवियों, पादरियों से देश भरा पड़ा है. कुछ केस याद आते हैं, जो पुराने भी नहीं हैं:
विश्वास एक ऐसी चीज है जिसको पाने के लिए हमें पैसों, स्टेटस, शिक्षा या ‘क्लास’ की जरूरत नहीं होती. किसी को ईश्वर मान लेने के लिए उसकी चार बातें ही बहुत होती हैं. उसकी कही गई पूजा कर संयोगवश मन की इच्छा एक बार भी पूरी हो जाए, तो हम उसके गुलाम बनने को राजी हो सकते हैं.
एक बाबा के लिए जब हजारों-लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर सैकड़ों को घायल कर सकते हैं, दसियों जानें ले सकते हैं, तो उस बाबा को अपनी ‘इज्जत’ दे देना भी अंधभक्ति में किया जा सकता है.
सीबीआई जांच में एक साध्वी ने बताया कि उससे डेरा की दूसरी औरतें अक्सर पूछा करतीं कि क्या उसे अबतक ‘पिताजी’ ने ‘माफ़ी’ दी है. उसे समझ नहीं आता कि इसका क्या मतलब है. जबतक बाबा ने खुद उसे अपनी ‘गुफा’ में नहीं बुलाया. वो गुफा, जो बाबा का सेक्सखाना थी.
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इन बाबाओं, धर्मगुरुओं के बारे में अगर हिम्मत कर लोग अपने घरवालों, दोस्तों या पुलिस को बता भी दें, तो भी सबसे पहले औरत को ही चुप रहने की हिदायत दी जाती है. 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी को लिखे हुए ख़त में अज्ञात औरत ने कहा था:
‘मैंने एक बार अपने परिवार वालों को बताया कि यहां डेरे में सब कुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है, तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरन किया कर. मैं मजबूर हूं. यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकती, घरवालों को टेलीफोन मिलाकर बात नहीं कर सकती…’
पिछले साल केरल में प्रीस्ट के हाथों लड़की का रेप हो जाने के बाद वहां की एक धार्मिक मैगजीन ने छापा था:
‘पादरी भी इंसान ही है. उस समय उसके शरीर की इच्छाओं ने उसको काबू कर लिया होगा. मगर वो लड़की भी तो धर्म से ईसाई थी. क्या ये उसका धर्म नहीं था कि वो पादरी को किसी तरह रोक ले.’
रेप करने वाला रेप इसीलिए करता है क्योंकि उसके हाथ में सत्ता होती है. जब रेप करने वाला पुरुष और होने वाली औरत हो, तो ये सत्ता शारीरिक के साथ सामाजिक होती है. और अगर रेप करने वाला बाबा हो, तो धार्मिक भी हो जाती है. इसपर बाबा के पास बंदूक भी रहती थी.
वैसे तो हर रेप दुनिया का सबसे जघन्य अपराध होता है. मगर धर्मगुरुओं, टीचरों या घर में भाइयों और पिताओं से रेप हो जाने पर शिकायत करने के लिए जिस तरह का साहस चाहिए, वो जान की बाजी लगाने जैसा है. गुरमीत को भी रेपिस्ट साबित करने के पहले कुछ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.
Source : https://goo.gl/5gnYFV
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